हाय ये कम्बख्त ठंड, कितनी यादे ले आती है, जो मन में जमी पड़ी थी, सारी उ भ र कर आती है मुंह से भाप निकलते हुए, स्वेटर पहन कर स्कूल जाना, राह में लगी आग पर हाथ सेंकने, वह कदमों का ठहर जाना | लडकपन से बाहर निकलते, यादों ने बदल दिये तेवर, धूप में चमकते उनके बालों ने, हमारी यादों में सजाए ज़ेवर | ठंडे ठंडे मौसम मे, उनके संग दो कदम चलना, उंगलियों के टकराने पर, मन ही मन मैं शर्मा जाना | आज के छोटे छोटे ये अनुभव, यादें बनकर रह जाएंगी, अगली ठंड पड़ते ही, बाहर निकल कर आएगी | -Riskycase
कैसी है ये जलन, जो भितर तेरे समायें। जो प्यारा है सबसे, उसको क्यों जलाएं। ये कैसा प्यार है जो नफरत में ही बस जाएं, समझ लेना ये डर है, जो खुदही को खुद से दुर ले जायें। मत कर इतनी नफ़रत, के उसकी आग सब कुछ जलाएं, एक बार सबकुछ खाक हुआ, तो उसमें कुछ भी ना उगा पाएं। कहकर गए वो ज्ञानी, तुम साथ में कुछ ना लाए, खाली हाथ आए थे, फिर रेत मुठ्ठी में क्यों दबाएं। - Riskycase